🌙 ख्वाबों की चादर 🌙
चांदनी रात में जब तन्हा होता हूँ,
तेरे ख्यालों की चादर ओढ़ लेता हूँ।
सन्नाटों से बातें करता हूँ अक्सर,
उन खामोशियों में तुझसे मिल लेता हूँ।
तेरी यादों की रौशनी ऐसी बसी है,
अंधेरे दिल में भी उजाला कर देती है।
तू पास नहीं फिर भी पास लगती है,
ये दूरी भी अब एहसास लगती है।
ख्वाबों की गलियों से तू जब गुजरती है,
मेरी नींदें भी तुझसे मोहब्बत करती हैं।
ये दिल तुझसे कुछ कह नहीं पाता,
पर हर धड़कन तेरा नाम ही गाता।
— तुम्हारा कवि
💔 तेरे बिना अधूरी है ये कहानी 💔
तेरी हँसी थी सुबह मेरी, तेरी बातों में शामें थीं,
अब हर लम्हा सूना है, जहां पहले तेरी बाहें थीं।
जब पहली बार तुझे देखा, वक़्त वहीं थम गया था,
तुझमें ही मेरी दुनिया थी, मेरा हर सपना सज गया था।
तू पास थी तो हर दर्द भी मोहब्बत सा लगता था,
अब तेरे बिना हर खुशी भी अधूरी लगती है सच्चा।
वो चाय की चुस्कियों में तेरा नाम गूंजता था,
वो पार्क की खामोशी भी तुझसे बातें करता था।
हर किताब के पन्नों में तेरा चेहरा छुपा रखा था,
हर शाम तुझसे जुड़ी किसी बात को दोहराया करता था।
अब तो ये दिल भी सवाल करता है खुद से,
"अगर वो मेरा था, तो गया क्यों दूर सबसे?"
कभी लगता है तू भी याद करती होगी मुझे,
फिर सोचता हूँ, शायद मैं ही रह गया अधूरा तुझे।
मोहब्बत की राहें आसान नहीं होती,
पर तेरे साथ तो हर मोड़ भी खास होती।
अब तू कहीं और सही, खुश रहना तेरा हक़ है,
ये तन्हा दिल तुझे आज भी अपना प्यार समझता है।
मेरी अधूरी मोहब्बत, तुझसे ही मुकम्मल है,
तेरे बिना भी ये दिल तुझसे ही बहलता है।
— एक खोया आशिक़