अनकही मोहब्बत ❤️
शहर की भीड़ में वो चेहरा पहली बार कॉफ़ी शॉप के कोने में देखा था। बाल खुले थे, आँखों में गहराई थी और मुस्कान... जैसे किसी अधूरी दुआ ने रंग पकड़ लिया हो।
"नाम क्या है?" उसने मुस्कुराते हुए पूछा था। और मैं जैसे कुछ पल के लिए वहीं रुक गया था।
रुही... बस इतना ही बोली थी वो। लेकिन उस नाम ने दिल में जगह बना ली थी।
हर हफ्ते हम उसी कॉफ़ी शॉप में मिलते, लेकिन न मैंने अपने दिल की बात कही, न उसने कभी पूछा। सबकुछ एक खूबसूरत रूटीन बन गया था, जैसे बिना टैग की कोई रिलेशनशिप।
🌧️ फिर एक दिन... सब बदल गया!
मैं हमेशा की तरह पहुँचा, लेकिन वो नहीं आई। हफ्तों बीत गए, कॉफ़ी ठंडी होती रही और मैं उसी टेबल पर उसका इंतज़ार करता रहा।
एक दिन, एक चिट्ठी मिली। उस चिट्ठी ने सब कुछ बदल दिया। उसमें लिखा था:
"मुझे कैंसर है। तुमसे दूर जाना जरूरी था, क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि मेरी अधूरी जिंदगी तुम्हारी खुशी छीन ले... पर तुम्हारे साथ बिताए हर पल मेरी दवा थे।"
उस दिन समझ आया, मोहब्बत कह देने से पूरी नहीं होती... कभी-कभी अनकही मोहब्बत ही सबसे गहरी होती है।
