💔 उस अनकहे प्यार की दास्तां 💔
वो कॉलेज की पहली मुलाकात थी, जब आरव की नजरें एक मुस्कुराती हुई लड़की, तान्या पर पड़ी थीं। न जाने क्यों, उसकी मुस्कान दिल को छू गई। दोनों की दोस्ती हो गई, फिर बातें होने लगीं, चैटिंग, कॉल, सबकुछ परफेक्ट था… लेकिन एक बात जो कभी नहीं हुई – "इजहार।"
आरव तान्या से बेहद प्यार करता था, पर डरता था कि कहीं वो रिश्ता भी न टूट जाए। उधर तान्या भी चाहती थी कि आरव कुछ बोले… पर वक्त यूं ही गुजरता रहा।
कॉलेज का आखिरी दिन आया। तान्या ने एक खत आरव को दिया – "अगर तुम मुझसे प्यार करते हो, तो स्टेशन पर मिलना… शाम 5 बजे। वरना मैं मान लूंगी कि मेरा इंतजार करने वाला कोई नहीं था।"
आरव भागा… फूल लेकर… दिल में हज़ारों ख्वाब लिए… लेकिन जब स्टेशन पहुंचा, तान्या वहां नहीं थी…
3 साल बीत गए… आज आरव को एक पुराने किताब के पन्नों में वो खत फिर मिला… और उसके पीछे एक दूसरी चिट्ठी थी, जो उसने पहले कभी देखी ही नहीं थी।
"आरव, अगर तुम ये चिट्ठी पढ़ रहे हो, तो शायद अब मैं इस दुनिया में नहीं हूं। मेरी बीमारी की सच्चाई बताने की हिम्मत कभी नहीं हुई मुझमें। मैंने सिर्फ तुम्हारा प्यार महसूस किया… और वो काफी था।"
आरव अब हर शाम उसी स्टेशन पर बैठता है… उसी वक्त… शायद एक बार फिर तान्या मिले… किसी और दुनिया से…
- एक अधूरी मोहब्बत 💔
💔 उस अनकहे प्यार की दास्तां – Part 2 💔
तान्या की चिट्ठी पढ़कर आरव की दुनिया थम गई थी। तीन साल से जिस मुलाकात का इंतजार कर रहा था, अब पता चला कि तान्या तो उस शाम ज़िंदा ही नहीं थी…
लेकिन एक बात खटक रही थी — **तान्या की बीमारी**? कौन सी बीमारी थी? उसने कभी क्यों नहीं बताया?
आरव ने सबकुछ छोड़कर तान्या की पुरानी डायरी ढूंढ निकाली, जो उसने कभी एक बार कहा था कि वो खुद से बातें उसमें लिखती है।
डायरी के आखिरी पन्नों में लिखा था:
“मुझे ब्लड कैंसर है… स्टेज थ्री… मैंने डॉक्टर से पूछा, कितनी ज़िंदगी बची है… उसने कहा – जितना दिल में हिम्मत हो।
पर मैं आरव को कमजोर नहीं देखना चाहती। मैं उसे बिखरते नहीं देख सकती। इसलिए मैंने जाने से पहले सिर्फ एक आखिरी उम्मीद छोड़ी – वो खत…”
आरव की आंखें भर आईं। अब सब कुछ साफ हो गया था। वो लौट आया उसी स्टेशन पर, जहाँ वो तीन साल से बैठता आ रहा था।
लेकिन उस दिन कुछ अलग था… एक छोटी सी लड़की, गुलाबी ड्रेस में पास आई, उसके हाथ में एक खत था।
“क्या आप आरव हैं?” उसने मासूमियत से पूछा।
“हाँ… पर तुम कौन?”
“ये मम्मा ने दिया था… बोला था, एक दिन आपको देना है।”
खत खोला… लिखा था:
“अगर ये खत तुम तक पहुँचा है, तो शायद मैं चली गई, लेकिन मेरी एक निशानी तुम्हारे पास है – **हमारी बेटी।** उसका नाम ‘आशा’ रखा है… क्योंकि मैं जानती हूँ, तुम कभी हार नहीं मानोगे…” ❤️
आरव अब उस स्टेशन पर नहीं जाता… क्योंकि अब उसके पास जीने की एक नई वजह है – तान्या की आखिरी आशा… उसकी बेटी।
– एक अधूरी मोहब्बत, जो पूरी हो गई... एक बेटी में ❤️
❤️ ये कॉलेज यादगार हो गया – भाग 3 (Past, Love और Mystery)
लेखक: Ritik Kumar
उस रात के बाद सिया कॉलेज नहीं आई। आयुष का दिल बेचैन था, वो हर जगह उसे ढूँढ रहा था। दोस्तों से पूछा, हॉस्टल के चक्कर लगाए, सोशल मीडिया तक खंगाल डाला… लेकिन सिया जैसे ग़ायब हो गई थी।
आख़िरकार एक दिन, आयुष को कॉलेज की लाइब्रेरी के बाहर सिया की डायरी पड़ी मिली। उसके पन्नों में एक कहानी थी – दर्दभरी, राज़दार, और चौंकाने वाली।
"मैं किसी से प्यार नहीं कर सकती… क्योंकि मेरा अतीत मेरे साथ नहीं चलने देता।"
"एक बार जो मुझसे जुड़ गया, वो या तो टूट गया… या खो गया। मैं एक साया बन गई हूं।"
आयुष का दिल काँप उठा। उसने तय कर लिया कि वो सिया को ढूँढ कर रहेगा, चाहे जैसे भी हो। अगले दिन वो गया सिया के पुराने पते पर… जहाँ एक बूढ़ी औरत ने दरवाज़ा खोला और कहा:
“तुम भी उसी की तलाश में आए हो? लेकिन बेटा, वो तो दो साल पहले ही इस शहर को छोड़ चुकी है… और जाते वक्त उसने कहा था – ‘अगर कभी कोई लड़का मुझे सच्चा प्यार करेगा, तो वो मेरे पास खुद आएगा… लेकिन उसे मेरा एक सच जानना होगा।’”
आयुष के होश उड़ गए।
“कौन सा सच?” – उसने पूछा।
बूढ़ी औरत ने बस मुस्कुरा कर कहा –
“ये सच तुम्हें उसी जगह मिलेगा जहाँ उसका सब कुछ छूट गया था… कॉलेज की पीछे वाली पुरानी लाइब्रेरी में। लेकिन बेटा, वहाँ अब कोई नहीं जाता…”
🌒 और उसी रात… आयुष अकेले पहुंचा उस वीरान लाइब्रेरी में... जहाँ कुछ ऐसा मिला जिसने उसकी रूह तक हिला दी।
क्या था वो रहस्य? क्या सिया सच में किसी डर से भाग रही थी? या वो खुद कोई राज़ है? क्या आयुष सिया तक पहुँच पाएगा?
पढ़िए आखिरी भाग में – “ये कॉलेज यादगार हो गया – भाग 4 (The Final Reveal)” 🔥

Super
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